नींद ..., लिखित : पथिक
नींद मेरी कहाँ खो गयी है ...... यह जिन्दगी भी .......... रात मैं कही खो गयी है ..... सब कुछ दीखता है .... पर मिलता नहीं कुछ ........... हर एक खुसी जेसे ............ राहों मैं खो गयी है ....... आज कोई नहीं है मेरे पास .......... तकलीफ बयान करती है ............. हर एक याद ............... बस कही से वोह आ जाये .............. जाने कहाँ खो गयी है ................. वोह ...... आज .............. नींद मेरी कहाँ खो गयी है ...... =================== लिखित : पथिक .......... विनय मिश्र "पथिक" ==================== © copyright by Vinay Mishra