Posts

Showing posts from February, 2012

नींद ..., लिखित : पथिक

नींद  मेरी  कहाँ  खो  गयी  है ...... यह  जिन्दगी  भी .......... रात  मैं  कही  खो  गयी  है ..... सब  कुछ  दीखता  है .... पर मिलता  नहीं कुछ ........... हर  एक  खुसी  जेसे   ............ राहों मैं  खो  गयी  है ....... आज  कोई  नहीं  है  मेरे  पास .......... तकलीफ  बयान  करती  है  ............. हर  एक  याद ............... बस  कही  से  वोह  आ  जाये  .............. जाने  कहाँ  खो  गयी  है  ................. वोह ...... आज .............. नींद  मेरी  कहाँ  खो  गयी  है ...... =================== लिखित : पथिक .......... विनय मिश्र "पथिक" ====================   © copyright by Vinay Mishra

यादे ...लिखित : - पथिक .

मैंने  उसे  रोते  हुए  देखा , अश्क  बहाते   हुए  देखा  , हर  एक  बूंद  मे  बबेसी   नज़र  आई , ना  जाने  वोह  आज  केसे   तड़प  आई , ----------------------------------- अश्क  की  धारा  थी  , की  वोह  ज़िन्दगी  की  बेबसी ,(गमो  का  सागर ). जेसे   हर  एक  बूंद  मैं , कह  रही  थी  अपना  एक  जीवन , ----------------------------------------- मैंने  उसे  रोते  देखा  , अश्क  बहाते   देखा .... ------------------------------------------ फूट  फूट  के  अश्क  बहते   थे  , हम  बे  बेबस  उन्हें  देखते  थे , आसुओं  के  इस  महासागर  में , मानो  कई  दरध  झलकते   थे , जेसे   हर  एक  बूंद  मैंने , टूटता...

तेरी आदत .... लिखित : पथिक ...

नज़र  से  रौशनी  जाने  से  पहले, एक  खाय्विश  है .. आज  तुह  जहां  भी  है .. बस  मेरी  आदत  मैं  तू  ही  शामिल  है .. तेरी  आदत  छूट  टी  नहीं , उम्मीद  ऐसी  है  जो  टूट  टी  नहीं ... =================== लिखित : पथिक .......... विनय मिश्र "पथिक" ==================== © copyright by Vinay Mishra

सागर ऍव मानव ...., लिखित :- पथिक ...

शांत  लहरे  भी , शांत  नहीं  आज लहरों  में  भी , झलकता  है  आक्रोश  आज , चिंतामई  मुंद्रा, पायसी  सोच , झगरती  है  आज .... तू  आज  रुष्ट  क्यों  है , परिवर्तन  तोह  जीवन  का  एक  रुख  है .... फिर  लगता  इतना  बेबस  तुह  क्यों  है  आज .... शांत  लहरे  भी  , शांत  नहीं  आज लहरों  में  भी , झलकता  है  आक्रोश  आज , हे  मानव , सभी  चिंताओं  में  डूबा  पढ़ा  है  आज , समझ  नहीं  आता  , तुझको  अब  ...... भाग  रहा  था  जिसके  पीछे  अब  तक  ...... क्यों  दर   रहा  है  अब  तुह  इसको  ....देख  कर .... तुहने  दिए  है  मुझको  , कितने  कष्ट  ...... हर  एक  कष्ट  पर  भी , मुस्कराता  था  में...