मन ही मन की बाते, बाकी सब ज्ञान --- लिखित - विनय मिश्र
मन ही मन की बाते बाकी सब झूठा कितनी सच्ची कितनी बुरी अपनी समझ ही समझदारी बाकी सब दुनियादारी मन ही मन की बाते, बाकी सब है ज्ञान। बाते करते है वह राजनीत की जो बनती जा रही बीमारी जिसमे हम अवल हिंदुस्तानी मन ही मन की बाते, बाकी सब है ज्ञान। हर कोई दे रहा अपना ज्ञान झूठी राजनीत मैं फसा आम इंसान खेल खिला रही है सभी पार्टिया कभी यहाँ कभी वहाँ सत्ता लोभ का, कभी धन बल का देश हित का न है कोई सरोकार बस मन ही मन की बाते, बाकी सब परोपकार। बैठा लिया है हमने मन मै राष्ट्र का ज्ञान जिसका हम सभी को नहीं है रति भर ज्ञान समाज की समझ है दोगली अपना दुःख सच्चा, बाकि सब झूठा एक धृतराष्ट्र भी भीष्म पर भारी वही यह हिन्दुस्तान है बस मन ही मन की बाते, बाकी सब धनवान | राह कठिन है देशवासियो आधार कमजोर, अस्तित्व - भूख - की है लड़ाई खतरा नजदीक और हम बेहपरवाह हित की खोज मैं हो रहे गुमशुदा बकाया खाता, बाकी लोकाचार है भाषण का दू...