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Showing posts from April, 2012

मैं कैसे, .. इन पलो को याद ..... रखु....By पथिक ..

ख़ुशी  के  लम्हों को खोजता हु पर दर्द ही नज़र आते है याद करता हु उन पलो को तोह आँखे भर आती है एहसास भी नहीं , परछाई भी नहीं साथी , समय का भी नहीं ध्यान फिर कैसे , इन आते जाते पलो को  समेतू........... मैं कैसे, .. इन पलो को याद रख़ू......... मैं कैसे, .. इन पलो को कैसे बिसरू ......... सुखी आँखों , मैं भी है बहुत नज़ारे .. उन  नजारो मैं भी , तलासता हु , उन पलो को मैं याद आने से रहे वोह पल, जोह सेमेटी है इन आँखों मैं, अनेकोओ कहानिया दर्द की... सुनाती बाते , लबो से है । मैं कैसे, .. इन पलो को याद रख़ू......... मैं कैसे, .. इन पलो को कैसे बिसरू ......... दोस्त भी मिले मुझे हज़ार, उनका भी वास्ता था सिर्फ दर्द से था अनेक.. खुसी भी जैसे महरूम थी अब मुझसे कैसे मैं याद  रखु, याद करू , वोह हसी के पल हर एक पल मैं होता है दर्द मुझे बाते भी पहुचाती थी दर्द मुझ तक ..    मैं कैसे, .. इन पलो को याद रख़ू......... मैं कैसे, .. इन पलो को कैसे बिसरू ......... जीवन को कसे दू , एक नया आयाम , जीवन को जो दे एक नया आयाम मैं भी याद रख सकू असे...

मेरा रब रूठा है आज ,..लिखित से : विनय मिश्र (पथिक)

आज  रब  रूठा  है  .... अब  सारा  जहाँ  रूठा  है  .... मैं  तोह  डूब  रहा  हूँ   इस  सागर  मैं ...... जिसका  नाम  लोगो  ने  इश्क  रखा  है ........... मेरा  रब   रूठा है  आज  ........... पहचान  खो  गयी  है  मेरी  कही  .......... याद  भी  नहीं  रही  उसकी  भी ....... लव्ज़ अब  कहते  नहीं  कुछ  भी  ....... साँसे  बंद  होने  मैं  ...... वक़्त  नहीं  है अब  ..... मेरे  रब   रूठा है  आज  .. Continue ......  ====================== Written By : Pathik......... लिखित से : विनय मिश्र (पथिक) © copyright by Vinay Mishra