मेरा रब रूठा है आज ,..लिखित से : विनय मिश्र (पथिक)
आज रब रूठा है ....
अब सारा जहाँ रूठा है ....
मैं तोह डूब रहा हूँ इस सागर मैं ......
जिसका नाम लोगो ने इश्क रखा है ...........
मेरा रब रूठा है आज ...........
पहचान खो गयी है मेरी कही ..........
याद भी नहीं रही उसकी भी .......
लव्ज़ अब कहते नहीं कुछ भी .......
साँसे बंद होने मैं ......
वक़्त नहीं है अब .....
मेरे रब रूठा है आज ..
Continue ......
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Written By : Pathik.........
लिखित से : विनय मिश्र (पथिक)
अब सारा जहाँ रूठा है ....
मैं तोह डूब रहा हूँ इस सागर मैं ......
जिसका नाम लोगो ने इश्क रखा है ...........
मेरा रब रूठा है आज ...........
पहचान खो गयी है मेरी कही ..........
याद भी नहीं रही उसकी भी .......
लव्ज़ अब कहते नहीं कुछ भी .......
साँसे बंद होने मैं ......
वक़्त नहीं है अब .....
मेरे रब रूठा है आज ..
Continue ......
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Written By : Pathik.........
लिखित से : विनय मिश्र (पथिक)
©copyright by Vinay Mishra
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