सागर ऍव मानव ...., लिखित :- पथिक ...

शांत  लहरे  भी , शांत  नहीं  आज
लहरों  में  भी , झलकता  है  आक्रोश  आज ,
चिंतामई  मुंद्रा, पायसी  सोच , झगरती  है  आज ....
तू  आज  रुष्ट  क्यों  है , परिवर्तन  तोह  जीवन  का  एक  रुख  है ....
फिर  लगता  इतना  बेबस  तुह  क्यों  है  आज ....

शांत  लहरे  भी  , शांत  नहीं  आज
लहरों  में  भी , झलकता  है  आक्रोश  आज ,

हे  मानव , सभी  चिंताओं  में  डूबा  पढ़ा  है  आज ,
समझ  नहीं  आता  , तुझको  अब  ......
भाग  रहा  था  जिसके  पीछे  अब  तक  ......
क्यों  दर   रहा  है  अब  तुह  इसको  ....देख  कर ....

तुहने  दिए  है  मुझको  , कितने  कष्ट  ......
हर  एक  कष्ट  पर  भी , मुस्कराता  था  में  तब ...
जीवन  का  हर  एक  कड़वा  घुट  , पिता  हर  एक  रोज़  था  मैं  तब ...
आज  पढ़ी  है  जब  मुसीबत .... तब  क्यों  कोसता  है  मुझको  अब ...

शांत  लहरे  भी , शांत  नहीं  आज
लहरों  में  भी , झलकता  है  आक्रोश  आज ,

विलाप  करता  है  अब  बैठकर  तुह  मेरे  पास ......
आज  जब  कोई  नहीं  है  साथी  तेरा ,... तब  लगती  है  तुझको  मेरी  आस .....
गहरायो  मैं  छुपी  तेरी  भावना  , निकालता  है  अब  तुह  मेरे  पास ......

जब  मैंने  अपना  गुस्सा  निकला  ....आपना ...
तब  तू  क्यों  भागता  है  आज  ..................

शांत  लहरे  भी , शांत  नहीं  आज
लहरों  में  भी , झलकता  है  आक्रोश  आज ,

सचाई  जो  है  तेरी ... वही  है  मेरी ...
वीनस  तेरा  सुनिस्चिते  है , तोह  मेरा  भी ..है  निश्चित ..

जीवन  के  हर  एक  खुशी  के  पल  ,
हसी  के  वोह  पल  ,
बिताता   था  जोह  मेरे  पास .....

आज  क्यों  कर  रहा  है  परेसान  मुझको ....
बस  बहुत  हो  चूका  ....
मत  कर  अब  परेसान  मुझको ......

बंद  कर  अपनी  यह  गन्दगी  ...........
कुछ   दिन  तुह  भी  रख  अपने  पास ............

फिर  देख  गुस्सा  क्यों  आता  है ......

पर   है  मानव  , तुझे  शांत  रहना  भी  कब  आता  है .....

शांत  लहरे  भी , शांत  नहीं  आज
लहरों  में  भी , झलकता  है  आक्रोश  आज ,
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लिखित :- पथिक ..............
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©copyright by Vinay Mishra

Comments

  1. mast hai mishra ji....lage raho....n agar book publish karwani ho to batana....heheheheh.....lolzzzzzzzzzzzzzzzzzz

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