जिए जा रहा हूँ: लिखित : विनय मिश्र "पथिक"

===== जिए जा रहा हूँ =====
राह देखता हूँ, फिर उसी के
जिनके लिए साँसे चलती थी
ना बोलते हुए भी याद किया करती थी

अब तोह खुछ भी नहीं , न ना और ना हां
छोड़ भी दिया कहा पर,जहां पर कोई नहीं अपना
खाली हाथों पर बस तस्वीर झलकती है

सपनो से बस यादें और दर्द झकलते हुए
जिए जा रहा हू बस, राह देखते हुए जिए जा रहा हूँ,
तक़दीर मैं तुम्हे पाने के लिए , बस लड़ता जा रहा हूँ, जिए जा रहा हूँ!

===== जिए जा रहा हूँ =====

लिखितविनय मिश्र "पथिक"

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©copyright by Vinay Mishra

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