नींद ..., लिखित : पथिक
नींद मेरी कहाँ खो गयी है ......
यह जिन्दगी भी ..........
रात मैं कही खो गयी है .....
सब कुछ दीखता है ....
पर मिलता नहीं कुछ ...........
हर एक खुसी जेसे ............
राहों मैं खो गयी है .......
आज कोई नहीं है मेरे पास ..........
तकलीफ बयान करती है .............
हर एक याद ...............
बस कही से वोह आ जाये ..............
जाने कहाँ खो गयी है .................
वोह ...... आज ..............
नींद मेरी कहाँ खो गयी है ......
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लिखित : पथिक ..........
विनय मिश्र "पथिक"
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यह जिन्दगी भी ..........
रात मैं कही खो गयी है .....
सब कुछ दीखता है ....
पर मिलता नहीं कुछ ...........
हर एक खुसी जेसे ............
राहों मैं खो गयी है .......
आज कोई नहीं है मेरे पास ..........
तकलीफ बयान करती है .............
हर एक याद ...............
बस कही से वोह आ जाये ..............
जाने कहाँ खो गयी है .................
वोह ...... आज ..............
नींद मेरी कहाँ खो गयी है ......
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लिखित : पथिक ..........
विनय मिश्र "पथिक"
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©copyright by Vinay Mishra
nic line but this time not for this
ReplyDeletebhai .........behetreeen kreti hai aap ki ye...........
ReplyDeleteThanks .. Mike...
ReplyDeleteNice Statements.....touching reality
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