इस जीवन मैं..... लिखित : विनय मिश्र 'पथिक'

अब  तोह  हर  दिन  तनहा  रहेंगे  ,
पतझड़  के  मौसम , अब  ऐसे  ही,  आते  रहेंगे 
इस जीवन  मैं...

समझने - समझाने  का  कोई  फायदा  नहीं अब   ....
अब  तोह  यह  आँखें  ऐसी  ही  रोती  रहेगी   ...
इस जीवन  मैं...

हम  तोह  हार  गए  अब,  समझाते  समझाते  ....
अक्सर  सभी,  बाते  करके ,   भूल  जाते  है !
इस जीवन  मैं ...

वक़्त किसके पास है इतना,  इस सफ़र मैं
कहने - कहलवाने मैं , गलती निकालने मैं
निकलती है सारी गलतियों , खाली  बातों मैं ,  इसलिए ..
डाल ली है अब आदत
चुपचाप रहने की ,
इस जीवन  मैं ...,इन  तहना रातों मैं ....

साथ मैं थे जो , आज हो चुके है पराये वो
भूल कर सब बाते , बाते बनाते है आज वोह ..
कभी खास थे , हम उनकी जिंदगी मैं,
रात के अँधेरे मैं आज गायब है हम
उनही लोगो के
इस  जीवन  मैं....

खो चूका हु मैं सभी को , दिनों के इस उजालों मे,
अब तो आदत हो चुकी है,  मुझे इन्हें खोने की ...

रातो मैं , रातो का सूनापन बतलाता है
भूल गया है तू बाते करना , हँसना ...
अब तोह तू
इस  जीवन  मैं....

डाल ली है अब आदत , इन सभी की
कोरे कागज़ की तरह
मैं भी पढने मैं आओगा
सबके लिखने मैं भी आ जाऊंगा
बोलने और बात करने की क्या है जरूरत
अब कोरे
इस जीवन मैं ......, चुपचाप रहने मैं... सुनने मैं...
मैं खो गया हु .. जीवन के इस .. भवर मैं..
चुपचाप रहने मैं.. सुनने मैं.
मैं इस जीवन को समझाने - समझने मैं ....
इस  जीवन  मैं....

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लिखित से : विनय मिश्र 'पथिक'
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©copyright by Vinay Mishra

Comments

  1. उलझनों को बया करती मेरी यह कविता आप सभी दोस्तों के लिए .

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  2. very good keep it up, you will become a good poem writer

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  3. Ish jaha me dilki sari bati isi tarha se baya kiya ja sakata hai

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  4. koi jab tumahara hridaya tod de tadpata huya jab koi chod de , tab tum mere pas aana priye , mera ghar khula hi rahega tumhare liye

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